Sunday, November 1, 2026

दिवाली की चमक

ये चमक ये दमक, फूलवन मा महक,
अब तो हर बात रक़म से है,
जिस दौलत के पीछे जग भागे,
वो खेल तो सारे भ्रम से है।
सिक्कों की खनक में डूबा जग,
हर रिश्ते का अब मोल यहाँ,
जज़्बात बिकें बाज़ारों में,
पैसा ही बस अनमोल यहाँ।
ये सुबह की दौड़, ये शाम की होड़,
बस जेबें भरने के ग़म से है,
ये चमक ये दमक, फूलवन मा महक,
अब तो हर बात रक़म से है।
मैं खड़ा किनारे देख रहा,
इस भागती दुनिया का मेला,
सब बेच के अपना चैन सुकून,
हर शख्स यहाँ कितना अकेला।
ना पाने की धुन, बस दिल में सुकून,
मेरा नाता मेरे मन से है,
ये चमक ये दमक, फूलवन मा महक,
अब तो हर बात रक़म से है।

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