Sunday, June 14, 2026

तन्हा सफ़र

अकेली, राह अकेली,
चलता जाए ये मुसाफ़िर मन।
ज़िंदगी एक काली रात है,
पर इंतज़ार में सुबह का क्षण।

मौत भी आएगी एक दिन,
खोल के द्वार उस उजाले का।
तन्हा चलना है तब तक,
तारों तले, अंधियारे का।

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